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Best Bewafa Shayari In Hindi [100+ बेवफा शायरी With Images]

Bewafa Shayari की तलाश हिंदी में, हम आपके लिए लाए हैं जबरदस्त Bewafa Shayari। आपको ऐसी चुनिंदा Bewafa Shayari In Hindi और कहीं नहीं मिलेंगी जो दिल के दुख को व्यक्त करती हैं।

यह Bewafa Shayari हिंदी में आपके लिए कुछ पुरानी यादें लेकर आएगी। और आपके मन को हल्का करेगा और आपके दुख को दूर करेगा।

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तेरी बेवफाई का सौ बार शुक्रिया,
मेरी जान छूटी… इश्क़-ऐ-बवाल से..!!

रोज़ ढलता हुआ सूरज ये कहता है
मुझसे आज उसे बेवफा हुए एक दिन और हुआ

मिल जायेगा हमें भी कोई टूट कर चाहने वाला !
अब शहर का शहर तो बेवफा नहीं हो सकता !!

अल्फाज़ तो बहुत है मोहब्बत को जताने के लिए !
जो मेरी खामुशी नहीं समझ सका वो मेरी मोहब्बत क्या समझेगा !!

अब के अब तस्लीम कर लें तू नहीं तो मैं सही,
कौन मानेगा कि हम में से बेवफा कोई नहीं।

मेरे फन को तराशा है सभी के नेक इरादों ने,
किसी की बेवफाई ने किसी के झूठे वादों ने।

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बेवफाई का मौसम भी अब यहाँ आने लगा है,
वो फिर से किसी और को देख कर मुस्कुराने लगा है..!!

जाते-जाते उसके आखिरी अल्फाज़ यही थे,
जी सको तो जी लेना मर जाओ तो बेहतर है।

महफ़िल में गले मिल के वो धीरे से कह गए,
ये दुनिया की रस्म है मोहब्बत न समझ लेना।

मुझे शिकवा नहीं कुछ बेवफ़ाई का तेरी हरगिज़,
गिला तो तब हो अगर तूने किसी से निभाई हो।

इस दुनिया में वफ़ा करने वालों की कमी नहीं,
बस प्यार ही उससे हो जाता है जो बेवफा हो।

वाकिफ तो थे तेरी बेवफ़ाई की आदत से,
चाहा इसलिए कि तेरी फितरत बदल जाये।

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रोये कुछ इस तरह से मेरे जिस्म से लग के वो,
ऐसा लगा कि जैसे कभी बेवफा न थे वो।

हमसे न करिये बातें यूँ बेरुखी से सनम,
होने लगे तो कुछ कुछ बेवफा से तुम।

उँगलियाँ आज भी इसी सोच में गुम हैं,
कि कैसे उसने नए हाथ को थामा होगा।

कैसे बुरा कह दूँ तेरी बेवफाई को,
यही तो है जिसने मुझे मशहूर किया है।

बंद कर देना खुली आँखों को मेरी आ के तुम,
अक्स तेरा देख कर कह दे न कोई बेवफा।

मेरी वफा फरेब थी मेरी वफा पे खाक डाल ।
तुझसा ही कोई बावफा तुझको मिले खुदा करे।

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ज़हर देता है कोई, कोई दवा देता है,
जो भी मिलता है मेरा दर्द बढ़ा देता है।

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हो सके तो मुड़ कर देख लेना जाते जाते,
तेरे आने के भरम में ज़िन्दगी गुज़ार लेंगे।

हम जमाने में यूँ ही बेवफ़ा मशहूर हो गये दोस्त,
हजारों चाहने वाले थे किस-किस से वफ़ा करते।

कोई नहीं याद रखता वफ़ा करने वालों को,
मेरी मानो बेवफा हो लो जमाना याद रखेगा।

तुम समझ लेना बेवफा मुझको, मै तुम्हे मगरूर मान लूँगा
ये वजह अच्छी होगी , एक दूसरे को भूल जाने के लिये

अरे बेपनाह मोहब्बत की थी हमने तुझसे ओ बेवफा !
तुझे दुःख दूं ये न होगा कभी खुद मर जाऊं यहीं ठीक है !!

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बहुत अजीब सिलसिले है मोहब्बत इश्क मैं,
कोई वफ़ा के लिए रोया तो कोई वफ़ा कर के रोया।

वफ़ा निभा के वो हमे कुछ दे ना सके
पर बहुत कुछ दे गये जब वो बेवफा हुए

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क्यों जिंदगी इस तरह तुम दूर हो गए
क्या बात है जो इस तरह मगरूर हो गए।
हम तरसते रहे तुम्हारा प्यार पाने को
बेवफा बनकर तुम तो मशहूर हो गए।।

हसीनो ने हसीन बनकर गुनाह किया,
औरों को तो ठीक पर हम को भी तबाह किया,
अर्ज़ किया जब ग़ज़लों मे उनकी बेवफ़ाई को तो,
औरों ने तो ठीक उन्होने भी वा वा किया

लफ्ज़ वही हैं, माईने बदल गये हैं !
किरदार वही, अफ़साने बदल गये हैं !
उलझी ज़िन्दगी को सुलझाते सुलझाते !
ज़िन्दगी जीने के बहाने बदल गये हैं !!

तुम अगर याद रखोगे तो इनायत होगी !
वरना हमको कहां तुम से शिकायत होगी !
ये तो बेवफ़ा लोगों की दुनिया है !
तुम अगर भूल भी जाओ जो रिवायत होगी !!

किसी को इतना भी न चाहो कि भुला न सको क्योंकि !
‪ज़िंदगी इन्सान और मोहब्बत तीनों_बेवफा‬ हैं !!

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मोहब्बत से भरी कोई गजल उसे पसंद नहीं,
बेवफाई के हर शेर पे वो दाद दिया करते हैं..!!

आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हुए !
महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए !
करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो !
पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुए !!

मैंने उस से वफ़ा की उम्मीद लगा रखी थी !
जिसके चर्चे आम थे बाजार में बेवफाई के !!

इंतज़ार की आरज़ू अब खो गयी है !
खामोशियो की आदत हो गयी है !
न सीकवा रहा न शिकायत किसी से अगर है तो !
एक मोहब्बत जो इन तन्हाइयों से हो गई है !!

सिर्फ एक ही बात सीखी इन हुस्न वालों से हमने​​,
​हसीन जिसकी जितनी अदा है वो उतना ही बेवफा है।

हर भूल तेरी माफ़ की तेरी हर खता को भुला दिया,
गम है कि मेरे प्यार का तूने बेवफाई सिला दिया।

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जब तक न लगे ठोकर बेवाफ़ाई की,
हर किसी को अपनी पसंद पर नाज़ होता है।

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उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा,
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है।

समेट कर ले जाओ अपने झूठे वादों के अधूरे क़िस्से
अगली मोहब्बत में तुम्हें फिर इनकी ज़रूरत पड़ेगी।

कुछ अलग ही करना है तो वफ़ा करो दोस्त,
बेवफाई तो सबने की है मज़बूरी के नाम पर।

इलाही क्यूँ नहीं उठती क़यामत माजरा क्या है,
हमारे सामने पहलू में वो दुश्मन के बैठे हैं।

इस दौर में की थी जिस से वफ़ा की उम्मीद,
आखिर को उसी के हाथ का पत्थर लगा मुझे।

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हमें तो कबसे पता था की तू बेवफ़ा है!
तुझे चाहा इसलिए कि शायद तेरी फितरत बदल जाये!!

दिल क्या मिलाओगे कि हमें हो गया यक़ीं,
तुम से तो ख़ाक में भी मिलाया न जाएगा।

उसकी ख्वाहिश है कि आँगन में उतरे सूरज,
भूल बैठा है कि खुद मोम का घर रखता है।

रहने दे ये किताब तेरे काम की नहीं,
इस में लिखे हुए हैं वफाओं के तज़करे।

अगले बरसों कि तरह होंगे करीने तेरे,
किसे मालुम नहीं बारह महीने तेरे।

अब देखिये तो किस की जान जाती है,
मैंने उसकी और उसने मेरी कसम खायी है।

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सामान बाँध लिया है मैंने भी अब बताओ दोस्त,
वो लोग कहाँ रहते है जो कहीं के नहीं रहते।

कैसे यकीन करें हम तेरी मोहब्बत का,
जब बिकती है बेवफाई तेरे ही नाम से।

जा तुझ को तेरे हाल पे छोड़ा,
इस से बेहतर तेरी सजा भी क्या है।

तेरी तो फितरत थी सबसे मोहब्बत करने की,
हम बेवजह खुद को खुशनसीब समझने लगे।

उस के यूँ तर्क-ए-मोहब्बत का सबब होगा कोई,
जी नहीं ये मानता वो बेवफ़ा पहले से था।

हम तो जल गये उसकी मोहब्बत में मोमकी तरह,
फिर भी कोई बेवफा कहे तो उसकी वफ़ा को सलाम।

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मोहब्बत का नतीजा दुनिया में हमने बुरा देखा
जिन्हे दावा था वफा का उन्हें भी हमने बेवफा देखा

वो सुना रहे थे अपनी वफाओ के किस्से,
हम पर नज़र पड़ी तो खामोश हो गए।

चाहते हैं वो हर रोज़ नया चाहने वाला.
ऐ खुदा मुझे रोज़ इक नई सूरत दे दे।

आख़िर तुम भी आइने की तरह ही निकले,
जो भी सामने आया तुम उसी के हो गए।

हम बेवफा हैं ऐलान किये देते हैं,
चल तेरे काम को आसान किये देते हैं।

किसी का रूठ जाना और अचानक बेवफा होना,
मोहब्बत में यही लम्हा क़यामत की निशानी है।

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वफ़ा निभा के वो हमे कुछ दे ना सके
पर बहुत कुछ दे गये जब वो बेवफा हुए

उसकी बेवफाई पे भी फ़िदा होती है जान अपनी,
अगर उस में वफ़ा होती तो क्या होता खुदा जाने।

बेवफा दुनिया में कौन सारी जिंदगी साथ देगा तेरा,
लोग तो दफना कर भूल जाते हैं कि कब्र कौन सी थी।

जिगर हो जायेगा छलनी आँखें खूब रोयेंगीं,
बेवफा लोगों से निभा कर के कुछ नहीं मिलता।

मिला के खाक में दिल को वो इस अंदाज़ में बोले,
मिट्टी का खिलौना था, कहाँ रखने के काबिल था।

जब तक न लगे एक बेवफाई की ठोकर,
हर किसी को अपने महबूब पे नाज़ होता है।

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मुझसे मेरी वफ़ा का सबूत मांग रहा है !
खुद बेवफ़ा हो के मुझसे वफ़ा मांग रहा है !!

बेवफाओं की इस दुनियां में संभलकर चलना,
यहाँ मुहब्बत से भी बर्बाद कर देते हैं लोग।

खुश हूँ कि मुझको जला के तुम हँसे तो सही,
मेरे न सही… किसी के दिल में बसे तो सही।

वो बेवफा हर बात पे देता है परिंदों की मिसाल,
साफ साफ नहीं कहता मेरा शहर छोड़ दो।

बहुत अजीब हैं ये मोहब्बत करने वाले,
बेवफाई करो तो रोते हैं और वफा करो तो रुलाते हैं।

तेरी बेवफाई ने हमारा ये हाल कर दिया है,
हम नहीं रोते लोग हमें देख कर रोते हैं।

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सिखा मुझसे ही मेरी मोहब्बत ने मोहब्बत करने का हुन्नर !
आज मेरी मोहब्बत गैरों से मोहब्बत रचा बैठी !!

मुझे मालूम है हम उनके बिना जी नहीं सकते,
उनका भी यही हाल है मगर किसी और के लिये।

तेरा ख़याल दिल से मिटाया नहीं अभी,
बेवफा मैंने तुझको भुलाया नहीं अभी।

बेवफायी का मौसम भी अब यहाँ आने लगा है,
वो फिर से किसी और को देख कर मुस्कुराने लगा है।

मेरी तलाश का है जुर्म या मेरी वफा का क़सूर,
जो दिल के करीब आया वही बेवफा निकला।

पहले इश्क फिर धोखा फिर बेवफ़ाई,
बड़ी तरकीब से एक शख्स ने तबाह किया।

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तू भी बेवफा निकला औरों की तरह, सोचा था !
की हम तुझसे ज़माने की बेवफाई का गिला करेंगे !!

अपने तजुर्बे की आज़माइश की ज़िद थी,
वर्ना हमको था मालूम कि तुम बेवफा हो जाओगे।

नज़ारे तो बदलेंगे ही ये तो कुदरत है,
अफ़सोस तो हमें तेरे बदलने का हुआ है।

ये उनकी मोहब्बत का नया दौर है,
जहाँ कल मैं था आज कोई और है।

ट्रैफिक सिग्नल पर आज उसकी याद आ गई,
रंग उसने भी अपना कुछ इसी तरह बदला था।

किस-किस को तू खुदा बनाएगी,
किस-किस की तू हसरतें मिटाएगी,
कितने ही परदे डाल ले गुनाहों पे,
बेवफा तू बेवफा ही नजर आएगी।

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जुल्मो सितम सहते रहे एक बेवफा की आस मे !
डुबो दिया मुझे दरिया ने दो घूट की प्यास में !!

बेवफा से दिल लगा लिया नादान थे हम,
गलती हमसे हुई क्योंकि इंसान थे हम,
आज जिन्हें नज़रें मिलाने में तकलीफ होती है,
कुछ समय पहले उनकी जान थे हम।

छोड़ गए हमको वो अकेले ही राहों में,
चल दिए रहने वो औरों की पनाहों में,
शायद मेरी चाहत उन्हें रास नहीं आई,
तभी तो सिमट गए वो गैर की बाहों में।

एक बेवफा से प्यार का अंजाम देख लो,
मैं खुद ही शर्मशार हूँ उससे गिला नहीं,
अब कह रहे हैं मेरे जनाज़े पे बैठ कर,
यूँ चुप हो जैसे हमसे कोई वास्ता नहीं।

ये नजर चुराने की आदत
आज भी नही बदली उनकी,
कभी मेरे लिए जमाने से और
अब जमाने के लिए हमसे।

मुझे उसके आँचल का आशियाना न मिला,
उसकी ज़ुल्फ़ों की छाँव का ठिकाना न मिला,
कह दिया उसने मुझको ही बेवफा…
मुझे छोड़ने के लिए कोई बहाना न मिला।

माना कि मोहब्बत की ये भी एक हकीकत है फिर भी,
जितना तुम बदले हो उतना भी नहीं बदला जाता।

मुझे शिकवा नहीं कुछ बेवफ़ाई का तेरी हरगिज़,
गिला तो तब हो अगर तूने किसी से निभाई हो।

चलो खेलें वही बाजी जो पुराना खेल है तेरा,
तू फिर से बेवफाई करना मैं फिर आँसू बहाऊंगा।

जल-जल के दिल मेरा जलन से जल रहा,
एक अश्क मेरे आँख में मुद्दत से पल रहा,
जिसका मैं कर रहा हूँ घुट-घुट के इंतजार,
वो बेवफा ना आई मेरा दम निकल रहा।

मेरे कलम से लफ्ज़ खो गए सायद
आज वो भी बेवफा हो गाए सायद
जब नींद खुली तो पलकों में पानी था
मेरे ख्वाब मुझपे रो गए सायद

कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी,
कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी,
बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने,
आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी

प्यार में बेवाफाई मिले तो गम न करना;
अपनी आँखे किसी के लिए नम न करना;
वो चाहे लाख नफरते करें तुमसे;
पर तुम अपना प्यार कभी उसके लिए कम न करना।

मैंने भी किसी से प्यार किया था
उनकी रहो में इंतजार किया था
हमें क्या पता वो भूल ज्यांगे हमें
कसूर उनका नहीं मेरा ही था
जो एक बेवफा से प्यार किया था !!

चलो छोड़ो ये बहस कि वफ़ा किसने की
और बेवफा कौन है
तुम तो ये बताओ कि आज ‘तन्हा’ कौन है !!

ये बेवफा, वफा की कीमत क्या जाने !
ये बेवफा गम-ए-मोहब्बत क्या जाने !
जिन्हे मिलता है हर मोड पर नया हमसफर !
वो भला प्यार की कीमत क्या जाने !!