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100+ Best Dard Bhari Shayari in Hindi ( दर्द भरी शायरी हिन्दी में )

Dard Bhari Shayari In Hindi(दर्द भरी शायरी)

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यह Dard Bhari Shayari (दर्द भरी शायरी) आपको दूसरों के साथ अपने दिल की व्यथा को व्यक्त करने में मदद करेगी।

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ये तो बस वही जाने जिसके दिल पर गुजरी हो,
तू क्या जाने दिल के दर्द और आंसुओं का रिश्ता क्या है

आंसुओं की बूँदें हैं या आँखों की नमी है,
न ऊपर आसमां है न नीचे ज़मी है,
यह कैसा मोड़ है ज़िन्दगी का,
उसी की ज़रूरत है और उसी की कमी है।

मेरी कोशिश हमेशा से ही नाकाम रही
पहले तुझे पाने की अब तुझे भुलाने की।

हाल तो पूछती नहीं दुनिया जिंदा लोगों का,
चले आते हैं लोग जनाज़े पर बारात की तरह…

वो आज करती है नजर अंदाज तो बुरा ना मान
टूट कर चाहने वालो को रुलाना रिवाज है दुनिया वालो का

शायरी में कहाँ सिमटता है दर्द-ए-दिल दोस्तो,
बहला रहे हैं खुद को जरा कागजों के साथ।

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लोग कहते है हम मुस्कुराते बहुत है,
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते।

हम बने ही थे तबाह होने के लिए
तेरा छोड़ जाना तो महज़ इक बहाना था

ज़ख्म दे कर ना पूछ तू मेरे दर्द की शिद्दत,
दर्द तो फिर दर्द है कम क्या ज्यादा क्या।

अब बस भी कर ज़ालिम, कुछ तो रहम खा मुझ पर,
चली जा मेरी नज़र से दूर कहीं मैं शायर ना बन जाऊं।

अब तो हाथों से लकीरें भी मिटी जाती हैं,
उसे खोकर मेरे पास रहा कुछ भी नहीं।

हमें देख कर जब उसने मुँह मोड़ लिया,
एक तसल्ली हो गयी चलो पहचानते तो हैं।

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खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है?
ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता।

इसे इत्तेफाक समझो या दर्द भरी हकीकत,
आँख जब भी नम हुई वजह कोई अपना ही था।

बदले तो नहीं हैं… वो दिल-ओ-जान के क़रीने,
आँखों की जलन दिल की चुभन अब भी वही है।

जो तार से निकली है वो धुन सबने सुनी है,
जो साज़ पर बीती है वो दर्द किस दिल को पता।

मुझे बहुत प्यारी है, तुम्हारी दी हुई हर एक निशानी,
चाहे वो मेरे दिल का दर्द हो या मेरी आँखों का पानी।

किस दर्द को लिखते हो इतना डूब कर,
एक नया दर्द दे दिया है उसने ये पूछकर।

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ज़िन्दगी यु भी कम है मोहब्बत के लिए
यु रूठ के वक़्त गुजारने की ज़रूरत क्या है

जब फुरसत मिले चाँद से मेरे दर्द की कहानी पूछ लेना,
सिर्फ एक वो ही है मेरा हमराज तेरे जाने के बाद।

नफ़रत करना तो हमने कभी सीखा ही नहीं,
मैंने तो दर्द को भी चाहा है अपना समझ कर।

आँसू गिरने की आहट नही होती
दिल के टूटने की आवाज नहीं होती
गर होता उन्हें एहसास दर्द का
तो दर्द देने की उन्हें आदत नहीं होती

अब मेरे हाल चाल नहीं पूछते हो तो क्या हुआ
कल एक एक से पूछोगे की उसे हुआ क्या था

मेरी हर शायरी दिल के दर्द को करेगी बयाँ,
तुम्हारी आँख ना भर आयें कहीं पढ़ते पढ़ते।

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लोग कहते है हर दर्द की एक हद होती है,
शायद उन्होंने मेरा हदों से गुजरना नहीं देखा।

लोग कहते है हम मुस्कुराते बहुत है,
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते।

ख्वाब बोये थे और अकेलापन काटा है,
इस मोहब्बत में यारों बहुत घाटा है।

फूलों मे अक्सर कांटे होते हैं
प्यार करने वाले अक्सर रोते हैं
तड़पते है दिवाने तमाम उमर
और तड़पाने वाले चैन से सोते हैं

समझा ना कोई दिल की बात को
दर्द दुनिया ने बिना सोचे ही दे दिया
जो सह गए हर दर्द को हम चुपके से
तो हमको ही पत्थर दिल कह दिया

शमा जाओ मुझ में तो पता लगे कि दर्द क्या है?
ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता।

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बांसुरी से सीख ले ऐ ज़िन्दगी सबक जीने का
कितने छेद है सीने में फिर भी गुनगुनाती रहेती है

कौन कहता है कि सिर्फ नफरतों मे ही दर्द होता है,
कभी कभी बेंपनाह मुहब्बत भी बहुत दर्द देती है।

कुछ गीले शिकवे हो तो दूर कर लेने चाहिए,
खामोशियां अच्छी नहीं होती रिश्तों के बीच।

हम बुरे कैसे हो गए दोस्तो…
दर्द लिखते हैं किसी को देते तो नही।

तेरे गम को अपनी रूह में उतार लूँ
ज़िन्दगी तेरी चाहत में सवार लूँ
मुलाकात हो तुझ से कुछ इस तरह
तमाम उम्र बस एक मुलाकात में गुजार लूँ

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कुछ राज़ तो क़ैद रहने दो मेरी आँखों में
हर किस्से तो शायर भी नहीं सुनाता है

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इस तरह मेरी तरफ मेरा मसीहा देखे,
दर्द दिल में ही रहे और दवा हो जाए।

नाराजगी चाहे कितनी भी क्यों ना हो,
पर तुझे छोड़ देने का ख्याल हम आज भी नहीं रखते

एक बात सिखाई है… ताजुर्वे ने हमें,
एक नया दर्द ही पुराने दर्द की दवा है।

बेवफा तेरा मासुम चेहरा
भुल जाने के काबिल नही
है मगर तु बहुत खुबसुरत
पर दिल लगाने के काबिल नही

नसीहत अच्छी देती है दुनिया,
अगर दर्द किसी ग़ैर का हो।

किसी का दिल इतना भी मत दुखाओ कि…
वो खुदा के सामने तुम्हारा नाम लेकर रो पड़े

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बेताब हम भी थे दर्द जुदाई की कसम
रोता तो वो भी होगा नज़रें चुरा चुरा कर

बहुत दर्द हैं ऐ जान-ए-अदा तेरे इश्क में,
कैसे कह दूँ कि तुझे वफ़ा निभानी नहीं आती।

कितना भी खुश रहने की कोशिश कर लो,
जब कोई याद आता है तो बहुत रुलाता है।

जो दिल में आए वो सब करना
बस एक गुजारिश है किसी से अधुरा प्यार मत करना

तन्हाई में गुजर जाएँ हम पर हजरों सदमे,
आँख में आँसू भी आयें ये ज़रूरी तो नहीं।

दर्द मोहब्बत का ऐ दोस्त बहुत खूब होगा,
न चुभेगा.. न दिखेगा.. बस महसूस होगा।

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प्यास ऐसी के पी जाऊं समंदर सारे,
नसीब ऐसा के मौजूद ज़हर तक नहीं…

अब तो तेरे लिये हम अजनबी हो गये
बातों के सिलसिले भी कम हो गये
खुशियो से ज्यादा गम हो गये
क्या पता ये वक्त बुरा हे या बुरे हम हो गये

ये जो हालात है, यकीनन एक दिन सुधर जाएंगे,
पर अफसोस के कुछ लोग दिल से उतर जाएंगे।

बुरा ये नहीं लगा कि तुम्हें अज़ीज़ कोई और है,
दर्द तब हुआ जब हम नजर अंदाज़ किए गए।

कभी हम पर ‎जान‬ दिया करते थे
जो हम कहते मान लिया करते थे
अब पास से अनजान बनकर गुज़र जाते है
जो कभी हम को दूर से पहचान लिया करते थे

ढूड ही लेता है मुझे किसी ना किसी बहाने से
दर्द वाकिफ हो गया है मेरे हर ठिकाने से

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कौन तोलेगा हीरों में अब तुम्हारे आंसू
वो जो एक दर्द का ताजिर था दुकां छोड़ गया।

मेरे अन्दर झाँक कर देखो टुकड़ों में मिलूंगा,
ये हँसता हुआ चेहरा तो दिखाने के लिए है।

मैंने नहीं चाहा है तुमसे अपनी वफ़ाओं का सिला,
बस दर्द देते रहा करो मुझे मोहब्बत बढ़ती जाएगी।

ना तो अनपढ़ रहे न ही काबिल हुऐ
हम खामखा ऐ इश्क तेरे स्कूल में दाखिल हुए.

कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिए
दिल तो एक खिलौना है जमाने के लिए

ना किया कर अपने दर्द को शायरी में बयान ऐ दिल,
कुछ लोग टूट जाते हैं इसे अपनी दास्तान समझकर।

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निकाल दिया उसने अपनी ज़िन्दगी से
भीगे कागज की तरह,
ना लिखने के काबिल छोडा ना जलाने के

मुझे क़बूल है हर दर्द, हर तकलीफ़ तेरी चाहत में..
सिर्फ़ इतना बता दे, क्या तुझे मेरी मोहब्बत क़बूल है?

फिर नही बसते वो दिल जो एक बार उजड़ जाते है
जनाजे को कितना भी सवार लो उसमे रूह नही आती

उसके न होने से कुछ नही बदला मुझ मे
बस जहाँ पहले दिल रहता था वहाँ अब सिर्फ दर्द रहता है

हमने सोचा था की बताएंगे,
सब दुःख दर्द तुमको।
पर तुमने तो इतना भी न
पूछा की खामोश क्यों हो!

पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना
फिर उसे खो देना और खामूश हो जाना

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ये ज़मीन की फितरत है के हर चीज़ को सोख लेती है,
वरना तेरी याद में गिरने वाले आंसुओं का एक अलग समंदर होता…

हम भी फूलों की तरह अक्सर तनह रहते है
कभी टूट जाते है तो कभी कोई तोड़ देता है

जिस दिल में बसा था नाम तेरा हमने वो तोड़ दिया
न होने दिया तुझे बदनाम बस तेरे नाम लेना छोड़ दिया

बहुत अजीब हैं ये बंदिशें मोहब्बत की,
कोई किसी को टूट कर चाहता है,
और कोई किसी को चाह कर टूट जाता है।

बदल जाते है वह लोग वक़्त की तरह,
जिन्हें हद से ज्यादा वक़्त दिया जाए।

बड़ी हसरत थी कोई हम्हे टूट कर चाहे
लेकिन हम ही टूट गए किसी को चाहते चाहते

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आँखें खुली तो जाग उठी हसरतें
उसको भी खो दिया जिसे पाया था ख्वाब में।

ना चाहते हुए भी छोड़ना पड़ता है
साथ कभी कभी,
कुछ मजबूरियां मुहब्बत से
भी ज्यादा गहरी होती है।

मरता नहीं कोई किसी के बगैर ये हकीकत है ज़िन्दगी
लेकिन सिर्फ सांस लेने को जीना तो नहीं कहते

मेरे दिल का दर्द किसने देखा है, मुझे बस खुदा ने तड़पते देखा है,
हम तन्हाई में बैठे रोते हैं, लोगों ने हमें महफ़िल में हँसते देखा है।

हर जख्म की आगोश मैं दर्द तुम्हारा है
हर दर्द मैं तस्कीन का एहसास भी तुम ही हो

ये जो तुम्हारी याद है ना बस,
यही एक मेरी जायदाद है…!!!

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तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दर्द,
तू किसी रोज मेरे घर में उतर शाम के बाद।

हम इश्क़ के वो मुकाम पर खड़े है
जहाँ दिल किसी और को चाहे तो गुन्हा लगता है

मत पूछा करो रात भर जागने की वजह
मोहब्बत मैं कुछ सवालों के जवाब नहीं होते

तेरी आरज़ू मेरा ख्वाब है, जिसका रास्ता बहुत खराब है,
मेरे ज़ख्म का अंदाज़ा न लगा, दिल का हर पन्ना दर्द की किताब है।

कितने अजीब है जमाने के लोग
खिलौना छोड़ कर जज्बातों से खेलते है।

रह रह के मुझे इतना रुलाते क्यूँ हो
याद कर नही सकते तो याद आते क्यूँ हो

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वो जान गयी थी हमें दर्द में मुस्कराने की आदत है,
देती थी नया जख्म वो रोज मेरी ख़ुशी के लिए।

बहुत आसाँ है इश्क़ में हार के खुदखुशी कर लेना
कितना मुश्किल है जीना, ये हमसे पूछ लेना

ज़ख्म जब मेरे सीने के भर जाएंगे, आंसू भी मोती बन के बिखर जाएंगे,
ये मत पूछना किसने दर्द दिया, वरना कुछ अपनों के सर झुक जाएंगे।

दर्द महसूस भी होता है, दिल आज भी तड़पता है
तेरी एक झलक के लिए दिल आज भी तरसता है

एक दो ज़ख्म नहीं जिस्म है सारा छलनी,
दर्द बेचारा परेशान है कहाँ से निकले।

हमें देख कर जब उसने मुँह मोड़ लिया,
एक तसल्ली हो गयी चलो पहचानते तो हैं।

अब दर्द उठा है तो गज़ल भी है जरूरी,
पहले भी हुआ करता था इस बार बहुत है।

मुझसे ऐ आईने मेरी बेकरारियाँ न पूछ,
टूट जाएगा तू भी मेरी खामोशियाँ सुन के।

जब्त कहता है कि खामोशी से बसर हो जाये,
दर्द की जिद है कि दुनिया को खबर हो जाये।

वो लफ्ज कहाँ से लाऊं जो तुझको मोम कर दें,
मेरा वजूद पिघल रहा है तेरी बेरूखी से।

ग़म सलीके में थे जब तक हम खामोश थे,
जरा जुबान क्या खुली दर्द बे-अदब हो गए।